"मत बताओ," उसने कहा।
उसका हाथ उसके सीने पर था — दो उँगलियाँ, जितना हल्का दबाव हो सकता है। वह दबाव जिसका अर्थ है — रुको; जिसका अर्थ है — ठहरो।
"अभी मत बताओ।"
गाड़ी आने में तीन घंटे थे। पर्दे पहले से खिंचे थे। फ़ोन पहले से उल्टा रखा था। दुनिया के न-होने का समझौता पहले ही हो चुका था — कुछ देर के लिए।
"तीन बजे बताओ," उसने कहा।
"अगर भूल गया तो?"
"भूलोगे नहीं।"
"अगर मन बदल गया तो?"
उसने दोनों उँगलियाँ उसके होंठों तक उठाईं — धीरे-धीरे, जैसे कोई घड़ी में वक़्त मिला रहा हो।
"नहीं बदलेगा," उसने कहा।