Skip to main content

संग्रहपुरानी लौ1 मिनट

वह शादी

A man in black tie standing with his open hand held out, and a woman in a dark green evening dress with her hair pinned up seated at a table looking up at him, her hand lifted but not yet in his, chandeliers above and blurred dancing guests behind, a candle and a wine glass on the linen.
Old friends. The people who make seating charts never know.

उन्होंने हमें एक ही मेज़ पर बिठा दिया था।

किसी ने, कहीं, बैठक के नक़्शे पर नज़र डालकर सोचा था कि यह मेहरबानी है। पुराने दोस्त। बैठक के नक़्शे बनाने वाले कभी नहीं जानते।

उसके एक हाथ में पेय था और चेहरे पर सात बरस और सुनने का वही पुराना अंदाज़ — ठोड़ी झुकी, नज़रें ऊपर, जैसे मेरा अगला शब्द ही उस कमरे की इकलौती घटना हो।

"तुम लग रही हो—" उसने शुरू किया।

"मत कहो," मैंने कहा।

"—वैसी ही," उसने फिर भी पूरा किया।

बैंड ने कोई धीमी धुन छेड़ी। हमारे चारों ओर शादीशुदा और होने-को-तैयार उठे और एक-दूसरे की ओर हाथ बढ़ाने लगे।

उसने नहीं पूछा। वह उठा, और हाथ बढ़ाया, और रुका रहा — उसी तरह जैसे हमेशा रुका रहता था, जैसे उसके पास पूरी रात हो, जैसे वह पहले ही तय कर चुका हो कि शाम का अंत कैसे होगा।

मैंने बाल उस तरह बनाए थे जैसे उसे कभी पसंद थे। मैंने ख़ुद से कहा था कि मैं भूल चुकी हूँ कि उसे यह पसंद था।

वह रात का दूसरा झूठ था, और रात अभी जवान थी।