वह पहले प्रकाश के लिए जागरूक हुई, फिर उसे एहसास हुआ कि वह उसे देख रहा है।
वह करवट लिए हुए था—बहाना नहीं बनाता, फ़ोन की ओर हाथ नहीं बढ़ाता। सिर्फ वहाँ। परदों से आती धूसर रोशनी उसके चेहरे को एक अलग तरह का धैर्य दे रही थी, जो रात को नहीं दिख रहा था।
वह नहीं हिली। न ही वह।
रेडिएटर उनके नीचे कहीं टिक कर रहा था। उसने सोचा कि वह इसे बाद में अपने आप को कैसे बताएगी—शायद कार में, रेडियो बंद करके—और पाया कि शब्द ही नहीं थे। इसका रूप शब्दों के लिए गलत था।
'हाय,' वह आखिरकार कहती है। 'हाय।' बस यही था, कुछ समय के लिए।
वह जहाँ लेटी थी, वहाँ से खिड़की दिख रही थी। आसमान इस समय वह करता है जो वह हमेशा करता है—अंधकार किनारों पर नरम और अनिर्णीत हो जाता है। सिल पर एक पौधा था जिसे उसने रात को नहीं देखा था। वह देखभाल किया हुआ लग रहा था।
'तुमने इसे जीवित रखा,' वह कहती है। वह इसकी ओर देखता है। 'ज्यादातर,' वह कहता है।
वह उसकी ओर फिर से मुड़ी। उसने 'ज्यादातर' शब्द के बारे में सोचा। एक ऐसे शब्द में कितना वजन हो सकता है।
'मुझे—,' वह शुरू करती है। 'हाँ,' वह कहता है। लेकिन वह नहीं हिली, और उसने उससे कुछ नहीं कहा, और प्रकाश बदलता रहा, वह करता रहा जो करता है, जो कुछ वह छूता है उसे पल भर के लिए रहने लायक बना देता है।
जब वह आखिरकार बैठ गई, तो उसने धीरे-धीरे किया। उसने बिना दीपक जलाए अपनी चीजें खोज लीं।
दरवाज़े पर वह ठहरी, उसका हाथ फ्रेम पर, पीछे की ओर नहीं देख रही। 'पौधे का एक नाम है,' वह अंधकार से कहीं से कहता है। 'मुझे नहीं पता कि मैं तुम्हें यह क्यों बता रहा हूँ।'
वह दरवाज़े पर मुस्कुराई। 'मुझे पता है,' वह कहती है। 'मुझे भी नहीं।'