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संग्रहपुरानी लौ1 मिनट

पुनर्मिलन

A woman in a black off-the-shoulder evening dress and a man in a dark shirt standing very close in a dim bar, their faces almost touching, her hand cradling the back of his neck and his hand at her waist, a bartender working blurred behind them.
The bartender pretended not to listen.

उसने उसके कंधे पहचाने, चेहरे से पहले — वे कमरे में कैसे होते थे, जैसे उनके इर्द-गिर्द की हवा को जानबूझकर तराशा गया हो।

वह मुड़ी, और उन दोनों के बीच के सात साल एक गलियारे में सिमट गए — एक गाना जिसके बोल वह भूल चुका था, वह ख़ास तरीका जिससे वह उसकी अच्छी कमीज़ें जानबूझकर बर्बाद करती थी।

"तुम आए," उसने कहा। बारटेंडर ने सुनने का नाटक नहीं किया।

"तुम जानती थीं कि आऊँगा।"

"मुझे पता था — शायद।"

उसका हाथ उसकी गर्दन पर गया — जैसे हमेशा जाता था। जैसे वहाँ छोड़कर रखा था और देख रही हो कि ताला अभी भी लगता है या नहीं। लगता था।

"अभी भी नाराज़ हो?" उसने पूछा।

"हाँ।"

"अच्छा।"