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आज रात की रचनाअगली सुबह1 मिनट

सिक्के

A Latina woman with a dark tousled short shag cut lies on her stomach in rumpled white sheets, her bare back to the sheet at her waist, laughing with her eyes shut and her cheek on the pillow; a broad-shouldered man with close-cropped black hair and stubble leans over her in an open dark wool coat over a bare chest, one hand flat between her shoulder blades, grey window light behind them.
Two hours.

पिछली रात उसने उसकी गली के पार्किंग मीटर में सिक्के डाले थे, अपनी ही समझदारी के ख़िलाफ़ जाकर दो घंटे ख़रीदे थे, और तब से एक बार भी यह नहीं सोचा था कि असल में समय क्या हुआ है।

वह आठ बजने से थोड़ा पहले जागी, चादर पर उस जगह ठंडी सिलवट देखकर जहाँ वह लेटा था, और उस कमरे की ख़ास ख़ामोशी के साथ जिसने उससे पूछे बिना ही कुछ तय कर लिया हो। खिड़की के बाहर धूसर हो चुका था। बिस्तर पर उसकी तरफ़ इतनी ठंडी हो चुकी थी कि यह पिछले दस मिनट में तो नहीं हुआ होगा।

वह वहीं लेटी रही, उस कहानी को दोहराते हुए जो वह रास्ते में अपने आप को पहले ही सुना चुकी थी — आसान वाली, वह जिसमें जाने के लिए किसी दर्शक की ज़रूरत नहीं होती — और लगभग उस पर यक़ीन कर चुकी थी जब उसने सीढ़ियों पर उसके क़दम सुने।

वह बिना कमीज़ के ऊपर आया, कुछ भी पहने बिना बस एक कोट ओढ़े, सीढ़ियों के नीचे जूते उतारे हुए और सड़क की ठंड अब भी उस पर टिकी हुई, दो उँगलियों के बीच एक छोटा-सा मुड़ा हुआ काग़ज़ थामे — जैसे यह उसे थमाया गया हो, न कि वह इसे लेकर आया हो।

"दो घंटे," उसने कहा, बिस्तर से पहले रुककर, दरवाज़े से पहले भी। "मैं यह बुरे तरीक़े से जानना नहीं चाहता था कि वक़्त कम पड़ गया।"

उसने रसीद साइड टेबल पर नहीं, बल्कि तकिए पर, उसके गाल के पास रख दी — जिसे वह बिना किसी के कुछ कहे समझ गई कि यही इस पूरी बात का असली मतलब था। उसका हाथ गरम चादर के नीचे उसकी कमर के मोड़ तक पहुँचा, और वह इतना ठंडा था कि वह चौंक गई — फिर, फिर से अपनी ही समझदारी के ख़िलाफ़, हँस पड़ी।

"रुक जाओ" शब्द पूरे समय वहीं, हाथ की पहुँच में पड़ा रहा, पर दोनों में से किसी ने उसे उठाया नहीं — जैसे कोई पहले से लबालब भरे गिलास को नहीं छूता — उसे छूने का बस एक ही नतीजा होता है, उसका छलक जाना।

दस बजे पार्किंग मीटर को फिर सिक्कों की ज़रूरत होगी। दस अभी नहीं था। और दस जब आएगा, तब भी वह माँगता रह सकता था।